Lalan Singh: क्या सत्ता और कुर्सी के लिए अपने बफादारों से भी मुँह मोड़ रहे नीतीश कुमार! ललन सिंह के इस्तीफे की इनसाइड स्टोरी से समझिए। ललन सिंह ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया है। उनके इस्तीफा देने के बाद, जदयू पार्टी की कमान अब नीतीश कुमार के हाथों में है। ललन सिंह के इस्तीफे का निर्णय पहले ही बना हुआ था और इसमें कोई अचानकी घटना शामिल नहीं थी। दूसरी ओर, नीतीश कुमार ने जदयू के नेतृत्व में आते ही आईएनडीआईए को भी एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। शुक्रवार को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में, जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में, नीतीश कुमार के ब्रांड के तहत एक संबंधपूर्ण घटना हुई।
क्या Lalan Singh के जाने से बिखर जाएगी JDU
इस बैठक के दौरान, कई संदेश जदयू की पक्ष से ब्रांड नीतीश के माध्यम से साझा किए गए, जिससे सभी को यह स्पष्ट हुआ कि नीतीश कुमार ही पार्टी की मुख्य दिशा निर्देशक हैं। आईएनडीआईए की बैठक में, पिछले कुछ दिनों में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खरगे को प्रधानमंत्री पद के लिए समर्थन देने का एलान किया था। इसके पश्चात यह घटना सार्वजनिक हो गई कि नीतीश कुमार ने समाप्ति का संकेत दिया। जदयू के नेतृत्व ने ममता बनर्जी के स्टैंड का सार्वजनिक विरोध किया, जिसे वे स्वतंत्र रूप से नकारा कर रहे थे।

क्या है Lalan Singh के इस्तीफे की वजह
बेहतरीन तरीके से नीतीश कुमार ने अपने नाराजगी का इंकार किया। चूंकि, कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुई इस घटना के बाद, जदयू ने उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया, जिससे I.N.D.I. Alliance को सीधा और स्पष्ट संदेश मिला। नीतीश के बिना, बिहार में आगे बढ़ने की चुनौती यह बताया जा रहा है कि बिहार में सीटों की संख्या के कारण बिना नीतीश कुमार के साथ, आगे बढ़ना मुश्किल होगा। उनकी पहचान तो वही रहेगी, हालांकि हाल ही में उनकी सेहत के बारे में अफवाहें चली थीं। लेकिन जैसे ही जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक हुई, वहां मौजूद ललन सिंह ने अपना इस्तीफा पेश किया जिसे तत्काल स्वीकार कर लिया गया।
Lalan Singh का इस्तीफा नीतीश का ‘मास्टर स्ट्रोक’
इसे ‘मास्टर स्ट्रोक’ कहा जा रहा है। ललन के इस्तीफे की कहानी तुरंत लिखी गई नहीं गई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के एक दिन पहले, पटना में नीतीश कुमार ने सार्वजनिक रूप से कहा कि सब कुछ सामान्य है और एक साल में राष्ट्रीय कार्यकारिणी होना नॉर्मल है। हालांकि, बैठक की शुरुआत होते ही, जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने अपने इस्तीफे की पेशकश की। उनके संबोधन में कयासों के अनुसार, ललन सिंह ने फिर से पार्टी के लिए काम करने का आश्वासन दिया। उपस्थित लोगों ने नीतीश कुमार को अध्यक्ष बनाने की मांग की और उन्होंने इसे तत्काल स्वीकार कर लिया। इस परिस्थिति की कहानी तुरंत लिखी गई नहीं गई।

नीतीश रोक सकते थे Lalan Singh को
जातिवाद की गणना भी महत्वपूर्ण थी जातिवाद की गणना भी महत्वपूर्ण थी। नीतीश कुमार ने इसे मुख्यतः आगे बढ़ाया था। रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग की अधिक संख्या थी। इसलिए, जदयू नेतृत्व को शायद इसे अच्छा नहीं लगा कि पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व सवर्ण जाति के नेता के हाथ में हो। एक वरिष्ठ जदयू नेता ने बताया कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक के तुरंत बाद ललन सिंह ने यह कहा कि वह पार्टी के लिए काम करते रहेंगे, जैसा कि उन्होंने पहले भी किया था। इस महीने के अंत में I.N.D.I. Alliance में सीट शेयरिंग के लिए महत्वपूर्ण बैठक होगी, जिससे अब ब्रांड नीतीश का सीधा हस्तक्षेप होगा।
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